8th Pay Commission: को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है महंगाई भत्ते यानी DA का 60 प्रतिशत के स्तर को पार कर जाना। यह केवल एक सामान्य आंकड़ा नहीं है, बल्कि आने वाले 8वें वेतन आयोग की दिशा और संभावित सैलरी स्ट्रक्चर का मजबूत संकेत माना जा रहा है। दिसंबर 2025 के CPI-IW आंकड़े सामने आने के बाद अब फिटमेंट फैक्टर को लेकर गणना काफी हद तक स्पष्ट हो चुकी है।
कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नया फिटमेंट फैक्टर कितना होगा और उनकी बेसिक सैलरी में कितनी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मौजूदा आंकड़ों और पिछले वेतन आयोगों के अनुभव को देखें तो यह साफ हो रहा है कि 1.60 से कम फिटमेंट फैक्टर की संभावना लगभग नहीं के बराबर है। अगर वेतन आयोग की सिफारिशों में देरी होती है, तो यह आंकड़ा 1.80 से 1.92 तक भी जा सकता है।
DA 60% पहुंचना क्यों है इतना अहम
हर नए वेतन आयोग में सबसे पहला कदम पुराने महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में मर्ज करना होता है। बिना ऐसा किए नया वेतन ढांचा तैयार नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि जैसे ही DA 60 प्रतिशत तक पहुंचा, 8th Pay Commission को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद से DA लगातार बढ़ता रहा है। लगभग एक दशक में महंगाई भत्ता अब 60 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच चुका है। इसका मतलब यह है कि वर्तमान बेसिक सैलरी पर महंगाई की भरपाई पहले ही काफी हद तक हो चुकी है।
DA 60% कैसे फाइनल हुआ
महंगाई भत्ते की गणना Consumer Price Index for Industrial Workers यानी CPI-IW के आधार पर की जाती है। यह डेटा हर महीने Labour Bureau द्वारा जारी किया जाता है और इसी के आधार पर DA तय होता है।
दिसंबर 2025 के लिए CPI-IW का आंकड़ा 148.2 दर्ज किया गया। नवंबर 2025 तक DA 59.94 प्रतिशत तक पहुंच चुका था। दिसंबर का आंकड़ा जुड़ते ही DA की गणना 60.35 प्रतिशत हो गई। भुगतान के लिहाज से सरकार आमतौर पर DA को राउंड ऑफ करके लागू करती है, इसलिए इसे 60 प्रतिशत माना जाएगा। भले ही इसका औपचारिक ऐलान मार्च 2026 में हो, लेकिन गणितीय रूप से DA अब 60 प्रतिशत माना जा रहा है।
DA और फिटमेंट फैक्टर का सीधा संबंध
यहीं से फिटमेंट फैक्टर की असली कहानी शुरू होती है। किसी भी वेतन आयोग में मौजूदा बेसिक सैलरी को 1 माना जाता है और वर्षों में जुड़ा DA महंगाई की भरपाई करता है।
अगर इसे आसान भाषा में समझें तो मान लीजिए कि 7वें वेतन आयोग की शुरुआत में किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 100 रुपये थी। समय के साथ DA बढ़ता गया और अब वह 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब यह हुआ कि आज वही सैलरी DA जोड़ने के बाद 160 रुपये के बराबर हो चुकी है।
इस स्थिति में अगर 8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर 1.60 से कम रखा जाता है, तो पिछली महंगाई की भरपाई ही पूरी नहीं होगी। इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि 1.60 फिटमेंट फैक्टर का न्यूनतम स्तर यानी फ्लोर माना जा सकता है।
न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर का गणित
दिसंबर 2025 का CPI-IW: 148.2
जनवरी 2026 के लिए कुल DA: 60%
DA सहित सैलरी इंडेक्स: 1.60
इस गणना के आधार पर 8th Pay Commission के लिए न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 से कम नहीं हो सकता। हालांकि यह केवल आधार है, अंतिम फैसला इससे ऊपर ही रहने की संभावना है।
क्या 1.60 ही फाइनल फिटमेंट फैक्टर होगा
इस सवाल का जवाब है – नहीं। 1.60 केवल न्यूनतम सीमा है, अंतिम आंकड़ा नहीं। असली तस्वीर वेतन आयोग की टाइमलाइन पर निर्भर करेगी।
अगर 8वें वेतन आयोग को जनवरी 2026 से प्रभावी माना भी जाए, तो उसकी सिफारिशें तुरंत लागू होना मुश्किल है। पिछले वेतन आयोगों का अनुभव बताता है कि आयोग को रिपोर्ट सौंपने में 18 से 24 महीने का समय लग सकता है। इस दौरान DA लगातार बढ़ता रहता है।
देरी का फिटमेंट फैक्टर पर असर
अगर 2026-27 और 2027 के दौरान DA की 3 से 4 किस्तें और जुड़ जाती हैं, तो DA 72 प्रतिशत से 76 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इस स्थिति में DA सहित सैलरी इंडेक्स 1.72 से 1.76 तक पहुंच जाएगा।
परंपरागत वेतन संरचना में सरकार आमतौर पर इसमें 12 से 16 पॉइंट का अतिरिक्त बफर जोड़ती है। इसी वजह से विशेषज्ञों का मानना है कि 8th Pay Commission का फिटमेंट फैक्टर 1.80 से 1.92 के दायरे में ज्यादा यथार्थवादी हो सकता है।
पुराने वेतन आयोग क्या संकेत देते हैं
अगर इतिहास पर नजर डालें तो तस्वीर और साफ हो जाती है।6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 रखा गया था। उस समय न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये थी।7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय हुआ, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये पहुंच गई।7वां वेतन आयोग अब तक का सबसे बड़ा सैलरी जंप माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि 8वें वेतन आयोग में 2.57 जैसा बड़ा उछाल दोहराना मुश्किल है। फिर भी 1.92 से 2.08 के बीच का दायरा पूरी तरह असंभव नहीं माना जा रहा।
संभावित सैलरी स्ट्रक्चर का अंदाज
अगर 1.92 फिटमेंट फैक्टर को आधार मानें, तो सैलरी में बड़ा बदलाव दिखता है।लेवल 1 की मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, जो 8वें वेतन आयोग में बढ़कर लगभग 34,560 रुपये हो सकती है।
लेवल 6 की बेसिक सैलरी 35,400 रुपये से बढ़कर करीब 67,968 रुपये तक पहुंच सकती है।लेवल 10 पर यह आंकड़ा 56,100 रुपये से बढ़कर लगभग 1,07,712 रुपये तक जा सकता है।यह केवल एक अनुमान है, लेकिन इससे कर्मचारियों को आने वाले बदलावों की दिशा समझने में मदद मिलती है।फिटमेंट फैक्टर तय करने में कौन-कौन से पहलू अहम होंगे DA एक बड़ा फैक्टर जरूर है, लेकिन अकेला नहीं। सरकार को कई अन्य बातों पर भी संतुलन बनाना होगा।
केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति
वेतन बढ़ोतरी से पड़ने वाला राजकोषीय बोझ
अलग-अलग सेवाओं और कैडर में वेतन संतुलन
कर्मचारियों की मांग और मनोबल
देश की आर्थिक ग्रोथ और भविष्य की महंगाई
इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही अंतिम फिटमेंट फैक्टर तय किया जाएगा।
यह चर्चा कर्मचारियों के लिए क्यों इतनी जरूरी है
फिटमेंट फैक्टर केवल बेसिक सैलरी तय नहीं करता, बल्कि उसी आधार पर DA, HRA, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सभी चीजें जुड़ती हैं। एक बार फिटमेंट फैक्टर तय हो गया, तो वही अगले 10 साल तक सैलरी स्ट्रक्चर की नींव बनता है।
इसलिए यह सिर्फ वर्तमान वेतन नहीं, बल्कि पूरे करियर और रिटायरमेंट प्लानिंग का सवाल है।
आगे क्या बदल सकता है
मार्च 2026 में DA की औपचारिक मंजूरी
जुलाई 2026 से DA की अगली गणना
8th Pay Commission को लेकर सरकार की आधिकारिक घोषणा
कर्मचारी संगठनों की मांगों में तेजी और आंदोलनों का असर
इन सभी घटनाओं से आने वाले महीनों में तस्वीर और साफ होगी।
निष्कर्ष
DA का 60 प्रतिशत तक पहुंचना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि 8th Pay Commission की दिशा दिखाने वाला बड़ा संकेत है। मौजूदा हालात में 1.60 से कम फिटमेंट फैक्टर की संभावना नहीं दिखती। अगर वेतन आयोग की प्रक्रिया में देरी होती है, तो यह आंकड़ा 1.80 से 1.92 तक भी जा सकता है।